
देश की नंबर-1 क्लीन सिटी इंदौर एक गंभीर public health crisis के चलते सुर्खियों में है। चमचमाती सड़कों और स्वच्छता रैंकिंग के पीछे छुपा सच तब सामने आया, जब भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से 17 लोगों की मौत हो गई और 400 से ज्यादा लोग बीमार पड़ गए।
High Court सख्त: “City Image खराब होगी”
इस गंभीर मामले को लेकर इंदौर हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि
“ऐसी घटनाएं इंदौर जैसे स्वच्छ शहर की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं।”
कोर्ट ने इसे सिर्फ एक इलाके की समस्या मानने से इनकार करते हुए इसे systemic failure करार दिया।
Chief Secretary को पेश होने का आदेश
भागीरथपुरा में मौतों और बीमारियों को लेकर तीन याचिकाएं दायर की गई थीं, जिन पर मंगलवार को एक साथ सुनवाई हुई।
High Court ने 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए MP के Chief Secretary को कोर्ट के सामने पेश होने का आदेश दिया है।

कोर्ट का साफ कहना है— “हम खुद सरकार से सुनना चाहते हैं कि साफ पानी क्यों नहीं मिल पाया।”
गंदा पानी, 17 मौतें और सिस्टम की चुप्पी
अब तक 17 लोगों की मौत, 400+ मरीज अस्पताल में भर्ती, कई मरीज इलाज के बाद discharge बताया जा रहा है कि contaminated drinking water supply इस पूरे संकट की जड़ है। हैरानी की बात ये है कि 31 दिसंबर 2025 को ही हाई कोर्ट ने सरकार और नगर निगम को साफ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।
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लेकिन ज़मीनी हकीकत?
Clean City में गंदा पानी, और गंदे सिस्टम में साफ जवाब गायब। क्या स्वच्छता सिर्फ झाड़ू और बैनर तक ही सीमित रह गई है?
- उबला या filtered पानी ही पिएं
- Fever, vomiting, diarrhea के लक्षण हों तो तुरंत hospital जाएं
- प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें
